पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा जारी नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021–22 में भारत का अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) पर व्यय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.83% हो गया, जो 2009–10 के बाद पहली बार 0.8% के स्तर से अधिक है।
सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) क्या है?
- यह किसी निर्धारित अवधि के दौरान अनुसंधान एवं विकास के लिए समर्पित सभी संसाधनों का कुल योग है।
- इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई), सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसई) तथा निजी उद्योगों द्वारा अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों पर कार्मिकों, उपकरणों, सामग्री तथा अन्य संबंधित व्ययों पर किया गया खर्च शामिल होता है।
- सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) किसी देश के नवाचार में निवेश तथा नए ज्ञान एवं प्रौद्योगिकियों के विकास की क्षमता का प्रमुख संकेतक है।
- अनुमान बताते हैं कि निजी क्षेत्र की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2023–24 में भारत के कुल अनुसंधान एवं विकास व्यय का 51.8% उद्योग क्षेत्र द्वारा किया गया।
वृद्धि के संभावित कारण:
- निजी क्षेत्र के निवेश में वृद्धि।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सर्वेक्षणों के दायरे का विस्तार, जिसमें अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों तथा उन उद्यमों को भी शामिल किया गया है जो पूर्व में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की मान्यता व्यवस्था के अंतर्गत शामिल नहीं थे।
- महामारी के बाद आर्थिक गतिविधियों में सुधार।
- इलेक्ट्रॉनिक्स, औषधि निर्माण, जैव-प्रौद्योगिकी, डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष जैसे प्रौद्योगिकी-प्रधान क्षेत्रों का बढ़ता महत्व।
राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रबंधन सूचना प्रणाली (NSTMIS)
- यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का एक कार्यक्रम है, जिसकी स्थापना 1982 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी।
- यह विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) से संबंधित आँकड़ों के संग्रह, विश्लेषण एवं प्रसार के लिए देश की नोडल प्रणाली है, जो साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण में सहायता करती है।
प्रमुख कार्य
- यह भारत के आधिकारिक अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) आँकड़े, जिनमें GERD भी शामिल है, संकलित करता है।
- यह यूनेस्को तथा आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के फ्रास्काती मैनुअल पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत कार्यप्रणालियों का उपयोग करता है।
- यह आरएंडडी स्टैटिस्टिक्स एट ए ग्लांस तथा अन्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार संकेतकों से संबंधित रिपोर्टें प्रकाशित करता है, जिनका उपयोग नीतिनिर्माण तथा अंतरराष्ट्रीय तुलना के लिए किया जाता है।
प्रमुख विशेषताएँ (GERD : ₹ लाख करोड़ में)
- 2020–21 में कोविड-19 महामारी के दौरान GERD में कमी दर्ज की गई।
- 2021–22 में अनुसंधान एवं विकास व्यय में 53% से अधिक की वृद्धि के साथ तेज़ सुधार हुआ।
- इसके बाद से अनुसंधान एवं विकास निवेश में निरंतर वृद्धि हो रही है।

- निजी क्षेत्र-आधारित नवाचार की ओर संरचनात्मक परिवर्तन: पहली बार निजी उद्योग का अनुसंधान एवं विकास व्यय केंद्र एवं राज्य सरकारों के संयुक्त व्यय से भी अधिक रहा।
- यह भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन है।
- इससे भारत उन विकसित अर्थव्यवस्थाओं के निकट पहुँचा है जहाँ अनुसंधान एवं विकास पर सर्वाधिक व्यय कॉर्पोरेट क्षेत्र करता है।
- उद्योग क्षेत्र का अनुसंधान एवं विकास व्यय लगभग दोगुना हुआ:इससे संकेत मिलता है कि भारतीय कंपनियाँ अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास तथा नवाचार में अधिक निवेश कर रही हैं।
इसका महत्व
- नवाचार क्षमता में वृद्धि: अनुसंधान एवं विकास में अधिक निवेश से वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता, उत्पादकता वृद्धि तथा दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
- उद्योग की बड़ी भूमिका: निजी निवेश में वृद्धि यह दर्शाती है कि उद्योग नवाचार-आधारित विकास में अधिक विश्वास दिखा रहा है, भारतीय एवं वैश्विक कंपनियों में आंतरिक अनुसंधान एवं विकास बढ़ रहा है तथा विश्वविद्यालयों, सरकार और उद्योग के बीच सहयोग मजबूत हो रहा है।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता: वैज्ञानिक प्रकाशनों, वैज्ञानिक प्रतिभा की उपलब्धता तथा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के मामले में भारत विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है।
- रिपोर्ट के अनुसार, अनुसंधान एवं विकास में बढ़ा हुआ निवेश इन शक्तियों को व्यावसायिक नवाचार तथा उन्नत विनिर्माण में परिवर्तित करने में सहायक होगा।
प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की स्थिति
- अनुसंधान एवं विकास की तीव्रता के मामले में भारत अभी भी नवाचार-प्रधान अर्थव्यवस्थाओं से पीछे है। उदाहरण:
- इज़राइल (~5%)
- दक्षिण कोरिया (4.8%)
- संयुक्त राज्य अमेरिका (3.5%)
- जापान (3.3%)
- चीन (2.4%)
- भारत (2021–22 में 0.83%)
- इससे स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र में आगे विस्तार की पर्याप्त संभावनाएँ हैं।
चुनौतियाँ
- अनुसंधान एवं विकास पर व्यय अभी भी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम है।
- सार्वजनिक क्षेत्र का निवेश अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ा है।
- उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच अधिक सुदृढ़ सहयोग की आवश्यकता है।
- अनुसंधान का व्यावसायीकरण अभी भी सीमित है।
- अनुसंधान अवसंरचना में क्षेत्रीय असमानताएँ बनी हुई हैं।
अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने हेतु सरकारी पहल
- अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान अधिनियम के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (एनआरएफ)।
- निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (आरडीआई) योजना।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, जैव-प्रौद्योगिकी विभाग तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा।
- भू-स्थानिक नीति, 2022, अंतरिक्ष नीति, 2023 तथा बायो-ई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण एवं रोजगार हेतु जैव-प्रौद्योगिकी) नीति, 2024 जैसे सक्षम नीतिगत ढाँचे, जिनमें निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी का प्रावधान है।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, राष्ट्रीय अंतर्विषयी साइबर-भौतिक प्रणाली मिशन, भारत सेमीकंडक्टर मिशन, राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन आदि राष्ट्रीय मिशन।
- नीति आयोग ने विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) द्वारा जारी वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत के प्रदर्शन का आकलन किया है।
- भारत की रैंकिंग 2021 में 46वें स्थान से बढ़कर 2025 में 38वें स्थान पर पहुँच गई।
- अन्य पहलों में अटल नवाचार मिशन, स्टार्टअप इंडिया, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन तथा इंडियाएआई मिशन शामिल हैं।
आगे की राह
- मध्यम अवधि में भारत के सकल अनुसंधान एवं विकास व्यय (GERD) को धीरे-धीरे बढ़ाकर जीडीपी के लगभग 2% तक पहुँचाया जाए।
- सार्वजनिक क्षेत्र द्वारा आधारभूत अनुसंधान में निवेश जारी रखते हुए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
- उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को और मजबूत किया जाए।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं अनुसंधान के व्यावसायीकरण की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, जैव-प्रौद्योगिकी, क्वांटम प्रौद्योगिकी तथा स्वच्छ ऊर्जा जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा दिया जाए।
- अनुसंधान अवसंरचना तथा कुशल मानव संसाधन के माध्यम से राज्यों में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाया जाए।
स्रोत: TH
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